नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की हवा एक बार फिर जानलेवा स्तर पर पहुँच गई है। प्रदूषण का स्तर AQI 600 के पार पहुंचते ही ‘सीवियर प्लस’ श्रेणी में दर्ज हो गया है, जिसके चलते बच्चों और बुजुर्गों में खांसी, सांस की तकलीफ और आंखों में जलन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। स्थिति बेहद गंभीर है, लेकिन सरकार की ओर से प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए न तो कोई ठोस कदम उठाया गया है और न ही कोई प्रभावी रणनीति दिख रही है। शहर दम घोंटने वाली हवा में जीने को मजबूर है और सवाल यह है कि आखिरकार इतनी भयानक स्थिति में भी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
इस बीच, दिल्ली के प्रमुख विपक्षी दल आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं—संजय सिंह, आतिशी, राघव चड्ढा से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तक—की चुप्पी भी लोगों के बीच गहरी चिंता पैदा कर रही है। इस जनस्वास्थ्य संकट के वक्त विपक्ष की यह खामोशी राजनीतिक जिम्मेदारी पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाती है। जब केवल सामाजिक संगठन आगे आकर संघर्ष कर रहे हैं, तब राजनीतिक नेतृत्व का यह सामूहिक मौन बेहद निराशाजनक है।
प्रदूषण में कोई सुधार नहीं, प्रशासन उदासीन:
दिल्ली–एनसीआर में वायु गुणवत्ता लगातार बिगड़ती जा रही है। AQI 600 से ऊपर पहुंचने के बावजूद न स्कूलों में फिजिकल क्लास बंद की गई हैं और न ही प्रदूषण रोकने के लिए सबसे कठोर नियम GRAP-4 लागू किए गए हैं। आज, 19 नवंबर 2025 को, इस बेहद गंभीर हालात पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने वाली है, और अब जनता की नज़रें अदालत पर टिकी हैं कि वह बच्चों की सेहत की सुरक्षा के लिए प्रशासन को कड़े निर्देश दे।
रेखा गुप्ता सरकार की नाकामी उजागर:
दिल्ली सरकार, जिसका नेतृत्व रेखा गुप्ता कर रही हैं, प्रदूषण संकट से निपटने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। जहरीली हवा की वजह से राजधानी में जनजीवन ठहर सा गया है, लेकिन इसके बावजूद कोई निर्णायक कदम उठता दिखाई नहीं दे रहा। स्कूल बंद करने, GRAP-4 लागू करने या अन्य सख्त उपायों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
सरकार की निष्क्रियता और केवल बयानबाजी जनता में गहरा रोष पैदा कर रही है। ऐसे समय में जब बच्चे और नागरिक स्वास्थ्य जोखिमों से जूझ रहे हैं, जनता को नेताओं के बयान नहीं, बल्कि राहत और स्वच्छ हवा की जरूरत है।
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