गोपालगंज,जन भारत TV ब्यूरो,
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर इस वर्ष 26 अगस्त को सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं हरतालिका तीज व्रत करेंगी। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। आचार्य मंजेश पाण्डेय जी ने बताया कि इस बार तीज का पर्व विशेष महत्व का है क्योंकि इस दिन चार शुभ योग—सर्वार्थ सिद्धि, शोभन, गजकेसरी और पंचमहापुरुष योग बन रहे हैं। इनमें से गजकेसरी योग विशेष रूप से दुर्लभ और अत्यंत शुभकारी माना जाता है।
तृतीया तिथि का आरंभ 25 अगस्त को दोपहर 12:34 बजे से होगा और इसका समापन 26 अगस्त को दोपहर 1:54 बजे तक रहेगा। उदया तिथि के अनुसार व्रत 26 अगस्त को रखा जाएगा।
आचार्य पाण्डेय जी ने बताया कि यह व्रत निर्जला रखा जाता है। महिलाएं पति की लंबी आयु, दांपत्य सुख, संतान सुख एवं सौभाग्य की प्राप्ति के लिए इस व्रत का पालन करती हैं। वहीं, अविवाहित कन्याएं मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं।
हरतालिका का अर्थ क्या है?
हरतालिका शब्द हरत और आलिका से मिलकर बना है। हरत का अर्थ है अपहरण करना और आलिका का अर्थ है सहेली। मान्यता है कि जब पार्वतीजी के पिता हिमालय उनका विवाह विष्णुजी से करवाना चाहते थे, तब उनकी सहेलियों ने उन्हें अपहरण कर जंगल में छिपा दिया था। वहां माता पार्वती ने शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। तभी से इस व्रत को हरतालिका तीज कहा जाता है।
व्रत विधि किस प्रकार करे:
प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
गौरी-शंकर की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर पूजन करें।
व्रत का संकल्प लेते समय “उमामहेश्वरसायुज्य सिद्धये हरितालिका व्रतमहं करिष्ये” मंत्र का उच्चारण करें।
महिलाएं व्रत कथा का श्रवण करती हैं और निर्जल व्रत का पालन करती हैं।
कब है पूजन का समय:
आचार्य पाण्डेय जी के अनुसार, जिन परिवारों में तृतीया तिथि के अंतर्गत ही पूजन का विधान है, वे 26 अगस्त को दोपहर 1:54 बजे से पूर्व ही पूजन कर लें। वहीं, दूसरी मान्यता के अनुसार यदि उदयकाल की तिथि मध्याह्न बाद भी समाप्त हो, तो सूर्यास्त तक पूजन करना मान्य होता है। इसलिए सूर्यास्त पूर्व पूजा करना उत्तम रहेगा।

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